जब आप दबाव, उद्देश्य और असफलता के भय के बीच उलझे हों, तो गीता आपको ईमानदार कर्म और चिंतित आसक्ति के बीच अंतर समझने में मदद करती है। इन श्लोकों से शुरुआत करें, फिर अपनी स्थिति पूछें।
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